इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का अध्ययन (Study of Electron microscope in Hindi)

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope)


बीसवीं शताब्दी में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का विकास जीव विज्ञान (Biology) एवं भौतिकी (Physics) के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप द्वारा वस्तु का लाखों गुना आवर्धित (Magnified) प्रतिबिम्ब बनता है। इसके लिए इलेक्ट्रॉन बीम (Electron beam) का उपयोग किया जाता है। इस माइक्रोस्कोप का आविष्कार नॉल एवं रस्का (Knoll and Ruska, 1931) नामक दो जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा किया गया। इसका व्यावसायिक उपयोग सर्वप्रथम सन् 1940 में किया गया।

सिद्धान्त (Principle) - इलेक्ट्रॉन बीम में बहुत छोटी तरंगदैर्घ्य वाले विद्युत् चुम्बकीय तरंग (Electro magnetic wave) के गुण होते हैं। इसका तरंगदैर्घ्य (Wave length) विद्युत् क्षेत्र (Electric field) उत्पन्न करने वाले वोल्टेज (Voltage) के वर्गमूल का व्युत्क्रमानुपाती (Inversaly propotional) होता है। उदाहरणस्वरूप, 80 KV विद्युत् द्वारा उत्पन्न इलेक्ट्रॉन बीम का तरंगदैर्घ्य 0-05A होता है। इलेक्ट्रॉन बोम का उत्पादन इलेक्ट्रॉन गन द्वारा होता है। बीम्स (Beams) को माइक्रोस्कोप के अन्य अंगों (Components) की सहायता से संकेन्द्रित (Concentrate) किया जाता है एवं इसके बाद इन्हें विद्युत् चुम्बकीय स्तरों (Electromagnetic layers) के द्वारा फोकस किया जाता है।

ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (Transmission Electron Microscope, TEM)

इस माइक्रोस्कोप में इलेक्ट्रॉन का मार्ग, प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश की किरणों के अनुरूप होता है। इलेक्ट्रॉन गन से प्रेक्षित इलेक्ट्रॉन बीम विद्युत् चुम्बकीय लेंसों (Electromagnetic lenses) की श्रेणी से होकर निकलती है।

स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (Scanning Electron Microscope, SEM)

बाद में विकसित इस प्रकार के इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का सिद्धान्त, TEM से भिन्न है। इसमें नमूने को सतह को इलेक्ट्रॉन की पतली बीम (Narrow beam) से विकिरणीकृत (irradiate) किया जाता है। इससे इलेक्ट्रॉनिक संकेत उत्पन्न होते हैं। इन विकिरणों के कारण नमूने से कम ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, जिन्हें धनावेशित प्लेट या ऐनोड पर एकत्रित किया जाता है। विद्युत् संकेतों का उपयोग नमूने (Sample) के प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

क्रिया-विधि (Method of application)-
TEM में वस्तु का आवर्धित चित्र देखने के लिए उच्च निर्वात (Vacuum) उत्पन्न करना आवश्यक होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन निर्वात में ही गमन करते हैं। इसके लिए नमूने (Sample) को पूर्णरूपेण निर्जलीकृत करना आवश्यक होता है। कण्डेन्सर लेंस इलेक्ट्रॉन बीम को नमूने पर समानान्तरित करता है और आवर्धन लेंसों (Magnifying lenses) द्वारा आवर्धित चित्र प्राप्त होता है। यह प्रतिबिम्ब एक 'फॉस्फोरेसेन्ट स्क्रीन' के सम्पर्क में आने पर दृश्य हो जाती है। एक मिलियन KV (Million KV) के त्वरण वोल्टेज वाला अभी-अभी विकसित किया । TEM का इलेक्ट्रॉन बीम 1 माइक्रोमीटर मोटे नमूने का भी प्रतिबिम्ब आसानी से बना सकता है। SEM में विद्युत् संकेतों का उपयोग नमूने का प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने में किया जाता है। स्कैनिंग जेनरेटर (Scanning generator) के उपयोग द्वारा के इलेक्ट्रॉन बीम को नमूने में से चित्र रेखा की तरह गमन कराया जाता है। ऐनोड पर द्वितीयक इलेक्ट्रॉन के टकराने से उत्पन्न संकेतों को टेलीविजन तंत्र की तरह स्कैन कर कैथोड (Cathode) पर प्रतिबिम्ब (Image) उत्पन्न किया जाता है। SEM की फोकस मापने की गहराई कई मिलीमीटर होती है। इसके द्वारा त्रिविमीय चित्र (Three dimensional image) प्राप्त किया जा सकता है।

उपयोगिता (Applications)

1. इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की अत्यधिक आवर्धन क्षमता होने के कारण अत्यन्त छोटे कोशिकांगों का अध्ययन इसकी सहायता से किया जाता है।

2. सूक्ष्मजीवों, विषाणु, स्पोर्स आदि के अध्ययन में यह सहायक है।

3. इसकी सहायता से नमूने के सतह का टोपोग्राफी (Topography) का अध्ययन भी किया जाता है।

4. कोशिकांगों (Cell organelles) के अलावा कोशिकांगों में पाये जाने वाले वृहत् जैविक अणुओं (Macrobiomolecules) की संरचना का अध्ययन भी इसके द्वारा किया जाता है।

सीमाएँ (Limitations)

वस्तु के अत्यन्त आवर्धित चित्र बनाने की क्षमता होने के बावजूद इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की अपनी सीमाएँ हैं। चूँकि वस्तु को उपयोग के समय उच्च निर्वात (Vacuum) में रखा जाता है, अतः जीवित वस्तु का अध्ययन इससे संभव नहीं है।
 


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