एड्स के वारे में टिप्पणी (Comments on Aids in hindi)

एड्स (AIDS) = एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसिएन्सी सिन्ड्रोम

यह एक विषाणु जनित रोग होता है यह रोग ह्यूमन इम्यूनो डेफिसिएन्सी विषाणु (HIV) नामक विषाणु के कारण उत्पन्न होता है। इस रोग में शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षण व्यवस्था नष्ट होती जाती है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है एवं शरीर विभिन्न प्रकार के रोगजनकों से संक्रमित हो जाता है। ऐसी स्थिति के कारण रोगी का जीवन कठिन समस्या बन जाता है।

एड्स का विषाणु RNA युक्त रिट्रोवायरस होता है। इसकी बाहरी सतह ग्लाइकोप्रोटीन की बनी होती है। बीच में प्रोटीन का आवरण तथा अन्दर एकसूत्री RNA के दो अणु होते हैं संक्रमण के पश्चात् यह विषाणु शरीर में 6-10 साल तक निष्क्रिय रूप से पड़ा रह सकता है। इस विषाणु से युक्त व्यक्ति अनेक वर्षों तक सामान्य प्रतीत होता है, परन्तु दूसरों में बीमारी फैलाने में सक्षम होता है। जब एड्स का विषाणु किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है तो यह विषाणु मानव शरीर की हेल्पर कोशिकाओं को मार देता है जिससे रोगी के शरीर में प्रतिरक्षियों का निर्माण प्रभावित होता है और फिर कुछ सालों बाद व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह समाप्त हो जाती है और रोगी विभिन्न संक्रमणों से ग्रसित हो जाता है।

एड्स की जाँच एलिसा टेस्ट एवं वेस्टर्न ब्लास्ट टेस्ट के द्वारा किया जाता है।

एड्स के लक्षण (Symptoms of AIDS)

(1) कई दिनों तक बार-बार दस्त एवं अतिसार का होना।
(2) त्वचा पर घाव का होना
(3) ज्यादा थकान का होना
(4) दवाइयों का असर न होना
(5) वजन कम होना
(6) चक्कर आना, रात में ज्यादा पसीना आना
(7) लसिका ग्रंथियों का फूल जाना एवं ठीक प्रकार से कार्य न करना
(8) मस्तिष्क की कार्य क्षमता में प्रभाव पड़ना।

एड्स के फैलने के तरीके (Spreading of AIDS)

यह रोग मुख्य रूप से चार प्रकार से फैलता है -

(1) अनैतिक यौन संबंध से जब कोई व्यक्ति एड्स से पीड़ित है और वह किसी दूसरे साथी के साथ यौन संबंध बनाता है तो स्वस्थ व्यक्ति में भी AIDS का संक्रमण हो जाता है।

(2) एड्स से पीड़ित व्यक्ति का खून दूसरे स्वस्थ मनुष्य को चढ़ाने से खून प्राप्त करने वाले को भी एड्स हो जाता है।

(3) एड्स से संक्रमित सुई के इस्तेमाल से भी एड्स फैलता है।

(4) एड्स से पीड़ित गर्भवती महिला के विषाणु भ्रूण में जाकर गर्भस्थ शिशु को भी संक्रमित कर देता है।

एड्स की रोकथाम (Prevention of AIDS)

(1) अनैतिक यौन संबंध से बचना चाहिए।

(2) रक्त चढ़ाने से पहले उसकी जाँच कर लेनी चाहिए।

(3) केवल एक बार उपयोग करने वाले सुई का ही उपयोग करना चाहिए।

(4) एड्स की सावधानी व जानकारी का प्रचार-प्रसार आम जनता को करना चाहिए।

एड्स का उपचार (Treatment of AIDS)

आज तक AIDS का सटीक एवं विशिष्ट उपचार संभव नहीं हो पाया है। कुछ दवाइयाँ जैसे- AZT एसिडोथायमिडिन आदि यह HIV विषाणु को काफी हद तक दबा देता है। इसके लिए दवाई टीके प्रस्तावित है लेकिन कोई भी अभी तक सफल नहीं हुआ है अत: रोकथाम ही इसका उपचार है।

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एड्स कैसे होता है?
एड्स होने के बाद शरीर को क्या होता हैं?

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