पारिस्थितिकी पर टिप्पणी (Comments on ecology in Hindi) BSC final year Zoology

पारिस्थितिकी (Ecology)

"सजीव का अपने चारों ओर के वातावरण के साथ पाए जाने वाले घनिष्ठ संबंध को पारिस्थितिकी (Ecology) कहा जाता है।"

उन्नीसवीं शताब्दी में जीवों के परस्पर संबंधों के अध्ययन को इथोलॉजी (Ethology), हेक्सिकोलॉजी (Hexicology) एवं इकोलॉजी (Ecology) नाम दिया गया। इकोलॉजी (Ecology) शब्द को सर्वप्रथम एन्ट हीकल (Ernst Haeckel) ने 1869 में प्रस्तुत किया एवं इसका सर्वप्रथम प्रयोग रीटर (Reiter) ने 1885 में किया |

पारिस्थितिकी की परिभाषा (Definition of Ecology)

इकोलॉजी (Ecology) शब्द की  उत्पत्ति ग्रीक शब्द oikos="house" तथा logos="study" से हुई है। इकोलॉजी (Ecology) को विभिन्न वैज्ञानिकों ने अपने-अपने तरह से परिभाषित किया है। कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं -

(1) हीकल (Haeckel, 1869) के अनुसार- "जीवों एवं उसके वातावरण के पारस्परिक संबंधों के अध्ययन को इकोलॉजी (Ecology) कहते हैं।"

(2) जे. क्रेब (J. Kreb, 1972) के अनुसार- "पारिस्थितिकी (Ecology) परस्पर संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन है, जो जीवों के वितरण एवं अधिकता को निर्धारित करता है।"

(3) ई. पी. ओडम (E. P. Odum, 1971) के अनुसार-  प्रकृति की संरचना और उसके कार्यों के अध्ययन को इकोलॉजी (Ecology) कहते हैं।"


कार्य क्षेत्र (Scope) - पारिस्थितिकी अपने आप में एक विज्ञान है, जिसका अध्ययन अनेक विधियों द्वारा किया जाता है। इसका कार्य क्षेत्र (Scope) वृहद् है और इसका अध्ययन निम्न प्रकार से किया जाता है -

(1) जैविक क्षेत्र (Biological scope) - इसके अन्तर्गत किसी इकोतंत्र में स्थित विभिन्न समुदायों (Communities) के बीच पारस्परिक संबंधों के परिणामस्वरूप उत्पन्न जैविक प्रभावों का अध्ययन किया जाता है, जो कि समुदाय विशेष पर प्रत्यक्ष प्रभावी होते हैं।

(2) भौतिक-रासायनिक क्षेत्र (Physico-Chemical scope) – इसके अन्तर्गत पारिस्थितिकी (Ecology) के अनेक भौतिक एवं रासायनिक कारकों, जैसे-ताप, प्रकाश, आर्द्रता, जल, पी.एच., भूमि एवं उसके रासायनिक तत्वों का अध्ययन किया जाता है क्योंकि प्रत्येक प्राणि के लिए इनका उचित स्तर पर होना अति आवश्यक होता है।

(3) वर्गीकरणात्मक क्षेत्र (Classificatory scope) – जीवों के वर्गीकरण एवं समुदाय में स्थान के निर्धारण के लिए वर्गीकरण (Taxonomy) का अध्ययन किया जाता है। क्योंकि पारिस्थितिकी के अध्ययन के लिए यह कार्य महत्वपूर्ण माना गया है।

(4) भौगोलिक क्षेत्र (Geographical scope) - भौगोलिक क्षेत्र का इकोलॉजी में महत्व के बारे में सर्वप्रथम वैज्ञानिक बफन (Buffon) एवं एलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट (Alexander Von Humboldt) ने बताया। सन् 1924 में आर. हेस्से (R. Hesse) ने पारिस्थितिकीय प्राणि-भूगोल का विस्तृत सर्वेक्षण किया।

(5) आनुवंशिक एवं क्रमिक विकास का क्षेत्र (Genetic and evolutionary scope) – प्रत्येक प्राणी जिस वातावरण में रहता है उससे हर तरह से प्रभावित होता है, परिणामस्वरूप नवीन प्रजातियों एवं उपजातियों (Species and Sub-species) की उत्पत्ति होती है, जो कि वातावरण से अधिक अनुकूलित होते हैं। प्रकृति द्वारा इस प्रकार अनुकूलीय परिवर्तनों (Adaptive changes) को स्थायित्व देना प्राकृतिक चयन कहलाता है। इस तरह सबसे उपयुक्त जीव ही बचते हैं बाकी समाप्त हो जाते हैं। इस तरह से हम देखते हैं कि पारिस्थितिकी (Ecology) का आनुवंशिकता एवं उद्विकास से निकटतम संबंध है।

(6) परिमाणात्मक क्षेत्र (Quantitative scope) - इस कार्यक्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न समुदायों (Communities) में जीवों की गणना या जनसंख्या के घनत्व का मात्रात्मक (Quantitative) अध्ययन किया जाता है। इस कार्य के लिए पारिस्थितिकी से संबंधित अन्य शाखाओं जैसे- मौसम विज्ञान, भूगोल, गणित, लिम्नोलॉजी, भूगर्भ विज्ञान आदि की सहायता ली जाती है।

(7) जनसंख्या गतिकी क्षेत्र (Population dynamic scope) - जनसंख्या गतिकी के प्रणेता माल्थस (Malthus, 1798) थे, उन्होंने बताया कि उपलब्ध भोजन जनसंख्या की वृद्धि को सीमित करने के लिए प्रभावित करता है। जनसंख्या वृद्धि एवं उसके नियंत्रण के विभिन्न पक्षों को डार्विन (Darwin, 1859), पलं (1925), गॉस (Gause, 1935) आदि वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किया। एन्ड्रिवर्था एवं बर्श (Andrewartha and Birch, 1954) ने बताया कि जनसंख्या के आकार का निर्धारण जलवायु एवं अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

जीवजगत के विभिन्न घटकों की तरह भौतिक पर्यावरण के संगठक (Constituents) भी परस्पर संबंधित होते हैं। इनकी कुछ अंतःक्रियायें जीवों के लिए लाभदायी होती हैं। जैसे— ओजोन, नाइट्रोजन तथा CO, सौर विकिरणों से आती पराबैंगनी किरणों (Ultravoilet rays) को छान देते हैं जबकि वातावरण में उपस्थित जलवाष्प अवरक्त विकिरणों (Infrared rays) को अवशोषित करती हैं। पृथ्वी के विभिन्न भागों में तापक्रम की विभिन्नता वायुगति का नियमन करती है। वातावरण में उपस्थित जल किसी स्थल के प्रकाश एवं तापमान की स्थितियों को प्रभावित करता है। इस तरह से हम देखते हैं कि पारिस्थितिकी (Ecology) जीवविज्ञान की अन्य शाखाओं से भिन्न है परन्तु उनसे संबंधित होती है। इस विज्ञान में अजीवित या भौतिक पर्यावरण तथा जैवीय संगठन सम्मिलित होते हैं। जैवीय संगठन के विभिन्न स्तर जैवीय-स्पेक्ट्रम (Biological spectrum) कहलाते हैं, जिसके अंतर्गत जीवद्रव्य, जीन्स, कोशिकांग अंगप्रणाली (Organ system), जीव, जनसंख्या (Population), समुदाय ( Community) तथा पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) सम्मिलित होते हैं अर्थात् पारिस्थितिकी, जीवों के समुदाय एवं पारिस्थितिक तंत्रों का विज्ञान है।