एम्फिऑक्सस का श्वसन तंत्र पर टिप्पणी | Comment on the respiratory system of Amphioxus in Hindi

एम्फिऑक्सस का श्वसन तंत्र

एम्फिऑक्सस से सम्बंधित प्रश्न -

प्रश्न: एम्फिऑक्सस के आहारनाल की रचना एवं खाद्य अंतर्ग्रहण विधि का वर्णन कीजिए? (Describe the structure and food intake method of alimentary canal of Amphioxus?)
प्रश्न: सिलियारी मोड ऑफ फीडिंग से आप क्या समझते है? (What do you understand by ciliary mode of feeding?)
प्रश्न: एम्फिऑक्सस के पाचन तंत्र का वर्णन कीजिए? (Describe the digestive system of amphioxus?)
प्रश्न: एम्फिऑक्सस का ओरल हुड पर टिप्पणी लिखिए? (Write a note on Oral Hood of Amphioxus?)
प्रश्न: एम्फिऑक्सस का श्वसन तंत्र पर टिप्पणी लिखिए? (Write a note on the respiratory system of amphioxus?)

एम्फिऑक्सस सिलियारी फीडर जंतु है, जो जल में उपस्थित सूक्ष्म जीवो एवं पदार्थो को भोजन के रूप में प्रयोग करता है |फैरिंक्स भोजन छानने तथा श्वसन का दोहरा कार्य करने हेतु विशेषीकृत होती है |

एम्फिऑक्सस का आहारनाल (Alimentary canal of Amphioxus) - इसके अंतर्गत निम्नलिखित भाग पाए जाते है -

1) मुख (Mouth) - प्राणी के अधर ताल पर शरीर के अगले सिरे पर मध्य में, एक अंडाकार छिद्र होता है, जिसे मुख  कहते है, यह छालादार झिल्ली से घिरा होता है, जिसे ओरल हुड कहते है |

2) ओरल हुड (Oral hood) - यह ट्रंक के डोर्सल और लेटरल की ओर के आगे बढे हुए भागो से बनता है | ओरल हुड के किनारों पर 10-11 जोड़े कड़े, सीधे, सिलिएटेड, ओरल या बक्कल सिर्री होते है, जिनमे सेन्सरी पैपिली पायी जाती है | बक्कल सिर्री के अन्दर की संख्या प्राणी की अवस्था बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती जाती है | ओरल हुड के किनारे एवं बक्कल सिर्री के अन्दर कड़ी जिलेटिनस कंकालीय छड़े पायी जाती है जो अन्तः कंकाल की भाँती कार्य करती है | भोजन अंतर्ग्रहण करते समय बक्कल सिर्री अन्दर की ओर मुड़कर मुह के ऊपर छलनी जैसी रचना बना लेते है, जिससे भोजन धारा के साथ-साथ बड़े पदार्थ पाचन तंत्र में जाने से रुक जाते है |

3) मुख गुहा (Buccal Cavity) या वेस्टिब्युली (Vestibulae) - ओरल हुड अपने नीचे एक गुहा को घेरे रहती है जिसे मुख गुहा या वेस्टिब्युली कहते है | इस गुहा की सतह एक्टोडर्म की बनी होती है | अतः इसे स्टोमोडियम कहते है |

4) एम्फिऑक्सस व्हील ऑर्गन (Amphioxus wheel organ) - ओरल हुड की भीतरी सतह की आधारीय एपिथीलियम 6 से 8 जोडी अन्गुलाकार उभार या फोल्डस में उठी होती है जिन्हें सम्मिलित रूप से व्हील ऑर्गन रोटेटरी या मुलर ऑर्गन कहते है क्योकि ये जल में चक्करदार या भवर के सामान धाराए उत्पन्न करते है, जिसके द्वारा भोजन के कण जल के साथ तेजी से मुह में जाते है | प्रत्येक अन्गुलाकार उभार के मध्य में सिलिएटेड ग्रूव होता है, जो चारो ओर एक सिलिएटेड रिज से घिरा रहता है | व्हील ऑर्गन में मध्य डोर्सल अन्गुलाकार उभार लम्बाई में सबसे बड़ा एवं कुछ बायी ओर स्थित होता है तथा इसमें एक ग्लैन्डुलर ग्रूव होता है जिसे हैस्चेक ग्रूव कहते है, जो एक डिप्रेसन में समाप्त होता है | इस डिप्रेसन को हैस्चेक पिट कहते है बाद में यह ग्रूव ओरल हुड की गुहा में खुलता है | दोनों ग्रूव तथा पिट म्यूकस का स्त्रावन करते है, जो जलधारा से भोजन के कणों को अलग करके एकत्रित करते है |

एम्फिऑक्सस व्हील ऑर्गन (Amphioxus wheel organ)

5) वीलम (Velum) अथवा एंटेरोस्टोम (Enterostom) - मुखगुहा एक छोटे से छिद्र द्वारा फैरिंक्स में खुलती है, जिसे वीलम कहते है | वीलम के किनारे पर 12 पतले, नुकीले, शंक्वाकार वीलर टेंटेकिल निकले रहते है | जिस पर बहुत सारे सिलिया तथा संवेदी अंग लगे रहते है |

6) फैरिंक्स (Pharynx) - ये बड़ा पार्श्व छोरो से दबा हुआ थैला होता है, जो कि लगभग शरीर के मध्य तक फैला रहता है | यह श्वसनांग के रूप में अधिक तथा पाचन अंग के रूप में कम कार्य करता है | इसकी दीवारों में लगभग 150-200 तिरछी गिल स्लिट्स होती है |

गिल स्लिट्स के बीच में गिल बार पायी जाती है, जो दो प्रकार की होती है -

i) प्राथमिक गिल बार (Primary gill bar) - अन्दर देह्गुहीय स्थान होता है | ये आपस में एक दुसरे से तिरछी दिशा में सेनेप्टीक्युली द्वारा जुड़े रहते है, जिससे फैरिंक्स टोकरी जैसा दिखाई देता है | सेनेप्टीक्युली को जिलेटिनस कंकालीय छड तथा रक्त वाहिका आधार प्रदान करती है | ये कंकालीय छड़े फटी हुई होती है |

ii) सेकेण्डरी गिल बार (Secondary gill bar) - इसके अन्दर सिलोमिक स्थान नही होता तथा ये सेनेप्टीक्युली के द्वारा नही जुड़े होते | इनके कंकालीय छड फटे हुए नही होते |

फैरिंक्स के फर्स पर एंडोस्टाइल अथवा हाइपोफैरिन्जियल खांच पाया जाता है | यह एक उथले गड्ढे के रूप में होता है, जो कि चार ऊर्ध्वं ट्रैक्ट का बना होता है | इन उर्ध्व मोड़ो के एकान्तरित क्रम में पांच एपिथैरिन्जियल होते है, जो कि सिलिएटेड होते है | उर्ध्व ट्रैक्ट, ग्रंथिल कोशिकाओं के बने होते है तथा ये म्यूकस स्त्रावित करते है |

iii) इसोफेगस (Oessophagus) - फैरिंक्स पीछे की ओर छोटी, संकरी नलिका में खुलता है, जिसे इसोफेगस कहते है, जिसकी आतंरिक सतह सिलिएटेड होती है |

iv) आमाशय (Stomach) - इसोफेगस, थोड़े चौड़े भाग में खुलती है, जिसे आमाशय कहते है |

v) आंत (Intestine) - आमाशय अंत में खुलता है | यह लगभग फैरिंक्स जितनी लम्बी होती है | यह देहभित्ती की पृष्ठ सतह से डोर्सल मिसेन्ट्री द्वारा ऐट्रियल केविटी में लटकती रहती है |

vi) मलद्वार (Anus) - अंत शरीर के बाहर मलद्वार द्वारा खुलती है, जो कि वेंट्रल फिन के बायी ओर स्थित होती है |

खाद्य अंतर्ग्रहण विधि (Intake Process of Food) - एम्फिऑक्सस सिलियारी अथवा फिल्टर फीडर होता है | यह सेडेन्टरी होता है तथा अपने पिछले भाग को मिट्टी तथा अगले भाग अगले भाग को जल की सतह से ऊपर रखता है |

व्हील ऑर्गन की सिलिया जल की चक्करधार धारा उत्पन्न करते है, जिससे खाद्य पदार्थ एकत्र होकर प्राणी के मुह तक पहुँच जाते है |

ओरल सिर्री अन्दर की ओर मुड़कर मुह के ऊपर एक चलनी का निर्माण करते है, जिससे बड़े भोज्य पदार्थ एवं धुल के कण मुह के अन्दर नही जा पाते | इसके पश्चात जल की धारा वेस्टिब्युली तथा वीलर टेंटेकिल से होकर फैरिंक्स तक पहुंचती है | वीलर टेंटेकिल जल की धारा को पुनः छानते है, जिससे बहुत ही महीन कण फैरिंक्स तक पहुँचते है | फैरिंक्स के गिल बार्स के सिलिया द्वारा जल्दी-जल्दी गति करने से फैरिंक्स तक जल की धारा लगातार बनी रहती है तथा जल ऐट्रीयम में एकत्र होने के बाद ऐट्रीयोफोर से शरीर के बाहर निकलता रहता है | फैरिंक्स में एंडोस्टाईल एवं फैरिन्जियल एपिथीलियम दारा स्त्रावित भोज्य पदार्थ म्यूकस में उलझ जाते है | यह भोज्य पदार्थ युक्त म्यूकस पहले लेटरल सिलिया द्वारा अधर द्वार की ओर धकेल दिया जाता है तथा फिर गिल बार के फ्रांटल सिलिया द्वारा पृष्ठ तल की ओर एपिफैरिन्जियल ग्रूव के ऊपर धकेल दिया जाता है |

इस प्रकार भोजन युक्त म्यूकस से निर्मित धारा एपिफैरिन्जियल ग्रूव से होकर गुजरती है | एपिफैरिन्जियल ग्रूव के सिलिया इस म्यूकस की धारा को इसोफैगस में धकेल देती है |

इसोफैगस में पहुँचते-पहुँचते भोजन म्यूकस से मिलकर लेई जैसी रचना बना लेता है | सम्पूर्ण आहारनाल की आतंरिक सतह पर छोटे-छोटे सिलिया पाए जाते है, जिनके गति करने से भोजन पाचन तंत्र में आगे बढ़ता है | इसोफोगस से भोजन मध्यांत्र में आता है जहा से यह लेटरल ट्रैक्ट ऑफ सिलिया द्वारा मिड गट डाइवर्टिकुलम में धकेल दिया जाता है | अब यह भोजन पुनः मध्यांत्र में आता है, सिलिया की इलियोकोलन रिंग भोजन को अच्छी तरह मथती है जिससे, पाचक रस भोजन में अच्छी तरह मिल जाता है |

एट्रियम - एट्रियम शरीर के दाए अधारी भाग से मेटप्लुयरल वलनो के नीचे पायी जाती है | यह एक्टोडर्म से आस्तरित होती है | एम्फिऑक्सस के क्लोम दरारे एट्रियम में खुलती है एट्रियम पीछे के तरफ अधर स्तर पर एक छिद्र के द्वारा बाहर खुलता है | जिसे एट्रियोपोर कहते है |