हॉर्मोन्स (Hormones)

हॉर्मोन शब्द का सर्वप्रथम उपयोग बैलिस तथा स्टार्लिंग (Bayliss and Starling) ने सन् 1902 में किया। हॉर्मोन शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द "हॉमोइन" (Hormoein) से हुई है, जिसका अर्थ "उत्तेजित करना होता है। अंतःस्रावी ग्रंथियों से स्त्रावित किये जाने वाले जटिल कार्बनिक पदार्थों की हॉर्मोन्स कहा जाता है। इन्हें शरीर के "रासायनिक दूत' (Chemical messenger) या "प्राथमिक दूत" (Primary messenger) भी कहा जाता है।

हॉर्मोन्स का वर्गीकरण (Classification of hormones)

हॉर्मोन्स को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है -1. स्टीरॉयड (Steroids) - यह लिपिड में घुलने वाले होते हैं इसका आधार पदार्थ कोलेस्ट्राल होता है।उदाहरण - अण्डाशय द्वारा स्रावित औऐस्ट्रोजेन (Oestrogens) एवं प्रोजेस्टीरॉन (Progesterone), वृषण द्वारा स्रावित टेस्टोस्टीरॉन (Testosterone)।2. अमीन्स (Amines) – यह हॉर्मोन्स अमीनो अम्ल, टाइरोसिन से रूपान्तरित होते हैं। यह सबसे साधारण प्रकार के हॉर्मोन्स होते हैं।उदाहरण - थायरॉइड ग्रन्थि द्वारा स्रावित टेट्रा आइडोथायरोनीन या थायरॉक्सिन ।3. प्रोटीन्स (Proteins) - यह अमीनो अम्ल के व्युत्पन्न पदार्थ होते हैं।उदाहरण- पैन्क्रीयास द्वारा प्रावित इन्सुलिन।

हॉर्मोन्स के प्रमुख भौतिक एवं रासायनिक लक्षण (Physical and chemical characters of hormones)

(1) हॉर्मोन्स कम अणुभार वाले एवं जल में घुलनशील रसायन होते हैं।(2) रासायनिक दृष्टि से यह प्रोटीन, अमीनो अम्ल, पेप्टाइड या स्टीरॉइड होते हैं।(3) ये बहुत कम मात्रा में अंतःस्रावी ग्रंथियों से स्त्रावित होते हैं और इनकी सूक्ष्म मात्रा ही काफी सक्रिय होती है।(4) से ऊतकों में सरलतापूर्वक फैल जाते हैं एवं कोशिका के अंदर आसानी से प्रवेश करते हैं।(5) ये सामान्यतः प्रत्यक्ष रूप से उपापचयी क्रियाओं में भाग नहीं लेते, बल्कि पूरी क्रियाशीलता को प्रभावित करते हैं।(6) हॉर्मोन्स रासायनिक क्रियाओं को नियंत्रित ही नहीं करते, बल्कि अपने लक्ष्य अंगों को नियंत्रित करते हैं।(7) अपने कार्यों को करते समय ये विघटित हो जाते हैं, अतः शरीर में इनका संचय नहीं होता है, जिसके फलस्वरूप इनका स्राव सदैव होता रहता है।(8) हॉर्मोन्स किसी जीव या जाति के लिए विशिष्ट नहीं होते हैं और एक ही हॉर्मोन विभिन्न जीवों में एक ही तरह के कार्य कर सकते हैं।(9) कुछ हॉर्मोन्स शरीर की सभी कोशिकाओं पर प्रभाव डालते हैं, जबकि अधिकांश हॉर्मोन्स शरीर की कुछ सीमित एवं निश्चित कोशिकाओं तक ही प्रभाव डालते हैं।(10) हॉर्मोन्स का आनुवंशिकी से कोई संबंध नहीं होता है।(11) अंतःस्रावी ग्रंथियों में बनने के बाद हॉर्मोन्स रक्त संचार में प्रवेश करते हैं और रक्त के साथ सम्पूर्ण शरीर में पहुँच जाते हैं।(12) हॉर्मोन्स विटामिन के समान कम सान्द्रता में क्रिया करते हैं। इनकी निश्चित मात्रा से कम या ज्यादा मात्रा में स्राव होने से शरीर में विपरीत प्रभाव उत्पन्न करती हैं।(13) कुछ हॉर्मोन्स का कार्य बहुत तेजी से होता है और वे शीघ्रता से नष्ट भी हो जाते हैं।(14) हॉर्मोन्स शरीर में कुछ प्रकार की क्रियाओं को प्रभावित करते हैं, लेकिन कभी भी इन क्रियाओं को प्रारम्भ नहीं करते हैं।(15) हॉर्मोन्स शरीर के द्रव्य संगठन एवं अन्य क्रियाओं पर नियंत्रित प्रभाव रखते हैं।(16) हॉर्मोन्स, तंत्रिका तंत्र की भूमिका को प्रभावित करते हैं।(17) कुछ हॉर्मोन्स अपने कार्य को अन्य हॉर्मोन्स की उपस्थिति पर ही कर पाते हैं।(18) हॉर्मोन्स की तीन श्रेणियाँ होती हैं, जिनमें प्रथम ऐमीन्स (Amines), द्वितीय प्रोटीन एवं तृतीय को स्टोरॉइड्स (Steroids) कहते हैं।(19) कोई भी हॉर्मोन्स अपने लक्ष्य कोशिका में इच्छित परिवर्तन करने में सक्षम हैं।हॉर्मोन्स दो तरह से कार्य करते हैं -(i) लक्ष्य कोशिका के कोशिका झिल्ली से बंधित होकर.(ii) जीव क्रियाशीलता में परिवर्तन द्वारा.लक्ष्य कोशिकाओं के कोशिका झिल्ली से हॉर्मोन जुड़कर प्राथमिक दूत (Primary messenger) की तरह कार्य करता है और ऐडीनायलेट सायक्लेज (Adenylate cyclase) को उत्तेजित करके कोशिकाद्रव्य में ATP से चक्रीय AMP (Cyclic AMP) का निर्माण करते हैं। यह चक्रीय AMP द्वितीयक दूत (Secondary messenger) की तरह कार्य करता है। इस कार्य के लिए Mg की उपस्थिति आवश्यक होती है।(20) कुछ हॉर्मोन्स अंत: कोशिकीय एन्जाइम तंत्र को प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय कर क्रिया करते हैं। कुछ हॉर्मोन्स की सूक्ष्म मात्रा कुछ एन्जाइम को या तो अवरोधित करती है या प्रेरित करती है।