प्रकाश सूक्ष्मदर्शी का अध्ययन तथा उसका प्रकार (Study of light microscope and its types in Hindi)

प्रकाश सूक्ष्मदर्शी (Light Microscope)

प्रकाश सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा उपकरण है जिसमें साधारण प्रकाश का उपयोग किसी संरचना या वस्तु को देखने के लिये किया जाता है। इसमें एक श्रृंखला में व्यवस्थित कई उभयोत्तल लेंसों (Convex lenses) का उपयोग किया जाता है, जो कि वस्तु का एक आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाते हैं। अधिकांश प्रकाश सूक्ष्मदर्शियों में वस्तु के प्रतिबिम्ब को नेत्रक (Eye piece) के द्वारा देखा जाता है।

प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश के बीम या किरणों को वस्तु पर फोकस करके लेंस के द्वारा वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाया जाता है। यह प्रतिबिम्ब बाद में आवर्धन हेतु एक या अधिक लेन्सों से गुजरता है तथा इस प्रतिबिम्ब को नेत्रक द्वारा देखा जाता है।

वस्तु के प्रतिबिम्ब का आवर्धन निम्न बातों पर निर्भर करता है -

1. प्रतिबिम्ब की दूरी ( Image distance) - प्रतिबिम्ब जितनी दूर बनेगा उसका आवर्धन उतना ही अधिक होगा।

2. अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी (Focal length of objective lens) - अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी जितनी कम होगी प्रतिबिम्ब का आवर्धन उतना ही अधिक होगा।

3. नेत्रक की फोकस दूरी (Eye piece focal length) - नेत्रक की फोकस दूरी जितनी कम होगी आवर्धन उतना ही अधिक होगा।

प्रकाश सूक्ष्मदर्शी के प्रकार (Types of Light Microscope)

लेंसों की संख्या के आधार पर प्रकाश सूक्ष्मदर्शी दो प्रकार के होते हैं -

1. सरल प्रकाश सूक्ष्मदर्शी एवं
2. संयुक्त प्रकाश सूक्ष्मदर्शी
1. सरल प्रकाश सूक्ष्मदर्शी (Simple Light Microscope)


ऐसे सूक्ष्मदर्शियों की आवर्धन क्षमता अत्यन्त कम होती है क्योंकि इनमें लेंसों की संख्या कम होती है। उदाहरण-विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी

1. विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी (Dissecting Microscope)

यह सबसे सरल प्रकार का सूक्ष्मदर्शी है जिसका उपयोग विच्छेदन (Dissection) विशेषकर वर्गिको अध्ययनों, भ्रूण के पृथक्करण, जैसे कार्यों में किया जाता है। इस सूक्ष्मदर्शी में एक उत्तल लेंस (Convex lens) का उपयोग किया जाता है जिसकी आवर्धन क्षमता 10X, 15X या 45X हो सकती है। यहाँ पर X यह दर्शाता है कि लेंस द्वारा वस्तु का कितना गुना आवर्धित चित्र बनता है।

विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी में घोड़े के नाल के आकार का एक आधार (Base) होता है। आधार से निकली हुई एक ऊर्ध्वं भुजा (Vertical arm) होती है, जिसे समायोजन स्क्रू द्वारा ऊपर-नीचे किया जा सकता है। इस भुजा के सबसे ऊपरी भाग पर एक मुड़ने या घूमने वाली क्षैतिज भुजा (Horizontal arm) लगी होती है। इस भुजा के आगे एक गोलाकार छल्ला होता है, जिसमें लेंस लगा होता है। लेंस को आसानी से लगाया या निकाला जा सकता है। लेंस के द्वारा वस्तु का उल्टा एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है। ऊर्ध्य भुजा (Vertical arm) पर लगे समायोजन स्कू (Adjustment screw) को ऊपर-नीचे करने से लेन्स भी ऊपर-नीचे होता है। लेंस के नीचे एवं स्टैण्ड से ऊपर काँच का बना एक मंच (Stage) होता है। स्लाइड को दबाने के लिए मंच पर स्टील की दो क्लिप्स (Clips) लगी होती है। मंच पर प्रकाश को फोकस (Focus) करने के लिए मंच के नीचे एक अवतल दर्पण लगा होता है।

विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी के उपयोग की विधि (Methods of use of dissecting microscope) - अध्ययन किये जाने वाले वस्तु को मंच के काँच (Glass) पर रखकर नीचे के दर्पण को इस प्रकार फोकस (Focus) किया जाता है कि वस्तु पर उचित प्रकाश पड़े। वस्तु की स्पष्ट प्रतिबिम्ब देखने के लिए समायोजन स्क्रू (Adjustment screw) को ऊपर-नीचे किया जाता है ताकि प्रतिबिम्ब सुस्पष्ट दिखाई दें। इस प्रकार वस्तु का अध्ययन किया जाता है।

2. संयुक्त प्रकाश सूक्ष्मदर्शी (Compound Light Microscope)

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का उपयोग पौधों की आन्तरिक संरचना (Anatomical structure) तथा कोशिकीय संरचना (Cellular structure) के अध्ययन में किया जाता है। इसके अनेक भाग होते हैं। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में दो लेंस (Lens) का उपयोग किया जाता है। एक लेंस आँख के पास होता है जिसे नेत्रक लेंस (Eye piece) कहते हैं। दूसरा लेंस वस्तु के समीप होता है, जो अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) कहलाता है। सूक्ष्मदर्शी में दोनों लेंसों को एक नली के अन्दर इस प्रकार समायोजित किया जाता है कि अभिदृश्यक लेंस द्वारा वस्तु का बना प्रतिबिम्ब नेत्रक लेंस के लिए पुनः वस्तु का कार्य करता है। इस प्रकार, वस्तु का दो बार आवर्धन (Magnification) प्राप्त होता है। वस्तु का प्रतिबिम्ब जो हम देखते हैं वह वस्तु से 100 से लेकर 1000 गुना तक बड़ा होता है। यह आवर्धन नेत्रक एवं अभिदृश्यक लेंस की आवर्धन क्षमता पर निर्भर करता है। 

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की संरचना (Structure of Compound Microscope)

1. बॉडी ट्यूब (Body tube) - यह नली बेलनाकार (Cylindrical) होता है एवं भुजा (Arm) के द्वारा जुड़ा होता है। इसके ऊपरी भाग में अंतर नली (Draw tube) तथा नेत्रक (Eye piece) एवं निचले भाग में दो या तीन अभिदृश्यक लेन्स (Objective lens) लगे होते हैं।

2. नेत्रक (Eye piece) - यह बाडा ट्यूब से लग अंतर नला (Draw tube) के ऊपर लगा होता है। इसकी सहायता से बाँयी आँख से वस्तु का अध्ययन करते हैं।

3. नोज पीस (Nose piece) - यह गोल एवं प्लेटनुमा होता है, जो बॉडी ट्यूब के नीचे फिट होता है। इसमें 2-3 अभिदृश्यक लेन्स (Objective lenses) लगे होते हैं। इस प्लेट को आसानी से घुमाया जा सकता है।

4. अभिदृश्यक लेंस (Objective lens)
- ये नोज पीस के नीचे फिट होते हैं एवं सामान्यतः 10X 40X एवं 100X पावर के होते हैं। इसे वस्तु के ऊपर फोकस किया जाता है। 5. मंच (Stage)- यह भुजा से जुड़ा होता है। इसमें एक छिद्र होता है, जिसकी सहायता से स्लाइड की वस्तु देखी जाती है।

6. कण्डेन्सर (Condenser) - यह मंच (Suage) के छिद्र के नीचे स्थित होता है। इसके द्वारा स्लाइड पर प्रकाश फोकस (Focus) किया जाता है।

7. आइरिस डायाफ्राम (Iris diaphragm) -
यह कण्डेन्सर के नीचे फिट होता है। इसके द्वारा प्रकाश के मार्ग को समायोजित किया जाता है।

8. दर्पण (Mirror) - यह आधार से थोड़ा ऊपर भुजा से जुड़ा गोल अवतल दर्पण (Concave mirror) होता है। इसे रिफ्लेक्टर भी कहा जाता है। यह प्रकाश को अपवर्तित करके स्लाइड की वस्तु की ओर मोड़ता है।

9. कोर्स एडजस्टमेंट (Coarse adjustment) -
इसकी सहायता से बॉडी ट्यूब (Body tube) को ऊपर-नीचे किया जाता है। ताकि लेंस को वस्तु पर फोकस किया जा सके।

10. फाइन एडजस्टमेंट (Fine adjustment) - यदि लेंस को फोकस करने के लिए बॉडी ट्यूब को बहुत थोड़ा ऊपर-नीचे करना होता है, तो इसका उपयोग करते हैं।

11. आधार (Base) -
यह घोड़े के नाल के आकार का होता है, जो ठोस लोहे का बना होता है। सूक्ष्मदर्शी को यह सहारा प्रदान करता है।

12. भुजा (Arm) – इसके द्वारा सूक्ष्मदर्शी का आधार एवं बॉडी ट्यूब जुड़े होते हैं। यह मुड़ा होता है, जिसे पकड़कर सूक्ष्मदर्शी को उठाते हैं।

प्रयोग विधि (Method of Use)

अध्ययन किये जाने वाले वस्तु को सर्वप्रथम मंच पर छिद्र के ठीक ऊपर रखा जाता है। कोर्स एडजस्टमेंट एवं फाइन एडजस्टमेंट (Coarse and fine adjustment) की सहायता से नेत्रक (Eye piece) एवं अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) को वस्तु पर फोकस (Focus) किया जाता है। प्रकाश को कण्डेन्सर की सहायता से समायोजित किया जाता है। अभिदृश्यक लेंस के द्वारा वस्तु का प्रतिबिम्ब बॉडी ट्यूब के अंदर बनता है। यह प्रतिबिम्ब (Image) वास्तविक, प्राथमिक एवं उल्टा (Real, primary and inverted) होता है। प्रतिबिम्ब का आवर्धन अभिदृश्यक लेंस की क्षमता (10X, 40X, 100X) के बराबर होता है। यह प्रतिबिम्ब नेत्रक के लिए वस्तु का कार्य करता है। इसका प्रतिबिम्ब पुनः आवर्धित होकर देखने वाले व्यक्ति के आँख के पास बनता है। जब अधिक आवर्धन (Magnification) की आवश्यकता होती है, तो 40 X एवं 100 X क्षमता वाले अभिदृश्यक लेंस का उपयोग किया जाता है।

सावधानियाँ (Precautions)

1. स्लाइड पर वस्तु को हमेशा कवर स्लिप (Cover slip) से ढँका होना चाहिए।

2. फोकस पहले कम पावर वाले ऑब्जेक्टिव लेंस की सहायता से की जाती है। बाद में इसे अधिक आवर्धन क्षमता वाले लेंस द्वारा फोकस किया जाता है।

3. उपयोग के पहले एवं बाद में लेंस को रेशमी रूमाल से साफ करना चाहिए।

4. हाई पावर में देखते समय कोर्स एडजस्टमेंट (Coarse adjustment) को नहीं छूना चाहिए। 5. लेंस को पानी के संपर्क में कभी नहीं आना चाहिए।

सीमाएँ (Limitations)

संयुक्त माइक्रोस्कोपी (Compound microscope) की अपनी कुछ सीमाएँ हैं। इसके द्वारा वस्तु का अधिकतम 2000-4000 गुना आवर्धन ही प्राप्त किया जा सकता है। अत्यन्त छोटे वस्तुओं, जैसे- कोशिकांग (Cell organelles) आदि का अध्ययन इस आवर्धन की सहायता से नहीं किया जा सकता।

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